January 21, 2012

सोशल मीडिया पर ‘अनायकों’ की महागाथाएं

2011 की एक सुबह इलाहाबाद के गोविंद तिवारी की नींद खुलती है तो पता चलता है कि वे रातों-रात एक ऑनलाइन सेलेब्रिटी में बदल चुके हैं। उनका नाम विश्वव्यापी ट्विटर ट्रेंड में शामिल हो चुका है। ट्विटर ट्रेंड में गोविंद तिवारी का नाम भारत में पहले और विश्व में पांचवें स्थान पर चमक रहा था।
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2 comments:

अजेय said...

महत्वपूर्ण पोस्ट. नज़रिया बदल रहा है तो नज़ारा भी बदलेगा..... हमें आरम्भिक अराजकताओं से घबराना नही चाहिए.
इस पोस्ट को अभी हाल ही मे सोशल मीडिय़ा (फेस्बुक, गूगल , ब्लोग्स्पोट) आदि के मामले को भारतीय कोर्ट तक पहुँचने के परिघटना के बरक्स भी देखा जाना चाहिए. चीन मे फेस्बुक पहले से प्रतिबन्धित है. क्या हमारी व्यवस्था , हमारा महान प्रजातंत्र एक *नेता* विहीन *संस्था* विहीन जनानान्दोलन को बर्दाश्त कर पाएगी ?

केवल राम : said...

यह लगभग तय है कि धीरे-धीरे सोशल मीडिया ही लोगों की सोच का पैमाना बनता जाएगा। यह किसी भी समाज की एक विराट धक-धक में बदल जाएगा या किसी हद तक बदल चुका है। शायद समाज विज्ञानियों को इसे नए सिरे से समझने की जरूरत पड़ेगी।


निश्चित रूप से आपकी यह पोस्ट भी उसी नजरिये को आगे बढाने का एक कदम है .....आपके द्वारा लिखी गयी बातें प्रासंगिक हैं ....!